अगले 5 चरण सबसे निर्णायक: 356 सीटों पर वोटिंग, इनमें से 2014 में भाजपा ने 223 सीटें जीती थीं

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के पहले दो चरणों में 186 सीटों पर वोटिंग के बाद तीसरे चरण से मुकाबला महत्वपूर्ण और निर्णायक होने वाला है। अगले 5 चरणों में जिन 356 सीटों पर वोटिंग होनी है, उनमें से पिछली बार भाजपा ने 223 सीटें जीती थीं। यानी 2014 में भाजपा की कुल जीती हुई 282 सीटों में से 80% सीटें यहीं से आई थीं। तीसरे से लेकर सातवें चरण तक 21 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की सीटों पर मतदान होगा।

शुरुआती दो चरण में जहां वोटिंग हुई, वहां क्षेत्रीय दलों की स्थिति मजबूत
पहले चरण में 11 अप्रैल को 91 सीटों पर मतदान हुआ। इनमें से भाजपा ने पिछली बार 32 और कांग्रेस ने 7 सीटें जीती थीं। इन 91 सीटों में आंध्र की सभी 25 और तेलंगाना की सभी 17 सीटों पर भी वोटिंग हुई। इन 42 सीटों पर टीआरएस, तेदेपा और वाईएसआरसीपी जैसे क्षेत्रीय दल भाजपा और कांग्रेस से बेहतर स्थिति में हैं। इन 42 सीटों में से पिछली बार भाजपा को 3 और कांग्रेस को 2 सीटें ही मिली थीं।

दूसरे चरण में 95 सीटों पर वोटिंग हुई। इनमें से पिछली बार भाजपा ने 27 और कांग्रेस ने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। इन 95 सीटों में तमिलनाडु की 39 में से 38 सीटों पर भी वोटिंग हुई थी। यहां भी क्षेत्रीय दल भाजपा-कांग्रेस से बेहतर स्थिति में हैं। पिछली बार इन 39 सीटों में से भाजपा सिर्फ एक सीट पर जीत सकी थी। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था। 2009 के चुनाव में भी कांग्रेस यहां से 8 सीटें ही जीत पाई थी। तमिलनाडु में भाजपा ने मुख्य गठबंधन अन्नाद्रमुक और कांग्रेस ने द्रमुक के साथ किया है।

तीसरे चरण में 23 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृह राज्य गुजरात की सभी 26 सीटों पर वोटिंग होनी है। पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा ने यहां की सभी सीटें जीती थीं। 2001 के बाद से ही राज्य में भाजपा की सरकार है। 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में 2001 के बाद पहली बार भाजपा 100 सीटों के अंदर सिमट गई थी। हालांकि, 99 सीटों के साथ भाजपा राज्य में सरकार बनाने में कामयाब रही थी। राजस्थान में 29 अप्रैल और 6 मई को कुल 25 सीटों पर मतदान होगा। यहां अभी कांग्रेस में सत्ता में है। पिछली बार भाजपा ने यहां की सभी 25 लोकसभा सीटें जीती थीं।

साध्वी प्रज्ञा ने कहा था- ढांचा तोड़ने पर मुझे गर्व
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने रविवार को कहा कि वे बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने गई थीं और उस पर चढ़कर उसे तोड़ा था। उन्होंने कहा, ‘"ढांचा तोड़ने पर मुझे गर्व है। ईश्वर ने मुझे अवसर और शक्ति दी थी, इसलिए मैंने यह काम कर दिया। मैंने देश का कलंक मिटाया था।" उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निश्चित रूप से बनाया जाएगा। उनके इस बयान पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए साध्वी प्रज्ञा को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

साध्वी की उम्र को लेकर विवाद क्यों?
साध्वी प्रज्ञा के इस बयान के बाद उनकी उम्र को लेकर दावे किए गए। दरअसल, इंटरनेट पर वायरल कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा की जन्म की तारीख 2 अप्रैल 1988 है। इसके बाद कई नेताओं और पत्रकारों ने भी दावा किया कि साध्वी प्रज्ञा का जन्म 1988 में हुआ था और इस लिहाज से जब बाबरी ढांचा गिराया गया, तब उनकी उम्र 4 साल रही होगी। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने भी इसी बारे में ट्वीट किया। सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने कहा कि बाबरी विध्वंस के वक्त अगर साध्वी प्रज्ञा 4 साल की थीं तो उन्होंने खुद चढ़कर ढांचा कैसे गिराया?

पड़ताल: अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, 2016 में 44 साल की थीं प्रज्ञा
महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाके में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भी आरोपी बनाया गया था। उन्हें 29 अक्टूबर 2008 को गिरफ्तार किया गया था। 2016 में साध्वी प्रज्ञा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। इसमें उन्होंने अपनी उम्र उस वक्त यानी 2016 में 44 साल बताई थी। इस हिसाब से उनका जन्म 1972 में हुआ था। इसके बाद 25 अप्रैल 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी। हाईकोर्ट के फैसले में भी उनकी उम्र 44 साल लिखी है। अगर साध्वी प्रज्ञा 2016 में 44 साल की थीं, तो 1992 में उनकी उम्र 20 साल रही होगी।

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